राग गौरी (भैरव अंग)

स्वर लिपि

स्वर रिषभ, धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर।
जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र
थाट भैरव
वादी/संवादी रिषभ/पंचम
समय दिन का चतुर्थ प्रहर
विश्रांति स्थान
मुख्य अंग सा रे१ सा ,नि सा ग रे१; म ग रे१ सा रे१ ,नि सा
आरोह-अवरोह सा रे१ ,नि सा ; सा रे१ ग म प ध१ प ; प ध१ नि सा' - सा' नि ध१ प म ग ; रे१ ग म ग रे१ ; सा रे१ ,नि सा ; ,ध१ ,नि ,ध१ सा ,नि सा;

विशेष - यह राग दया और इश्वर भक्ति कि भावना से ओत प्रोत है। इसलिये इस राग मे भक्ति रस और विरह रस कि बन्दिशें अधिक सुनाई देती हैं। इस राग मे भैरव अंग है, पर ये भैरव राग जितना गम्भीर नही है। यह स्वर संगतियाँ इस राग को राग भैरव से भिन्न करती हैं - सा रे१ ग म ग ; रे१ ग रे१ म ग रे१ सा रे१ ,नि सा ; ग म प ध१ प ; प ध१ नि सा' ; ध१ नि ध१ सा' नि ; ध१ प म प म ध१ प म ; ग रे१ ; सा रे१ ,नि सा

यह स्वर संगतियाँ राग गौरी का रूप दर्शाती हैं - ग म प ध१ प ; म प म ध१ प म ग ; म ग म ; प प म ग रे१ ग ; रे१ ग रे१ म ग रे१ सा ,नि ; सा रे१ ग म ग;